Thursday, June 9, 2011

बाबा रामदेव जी, आप क्यों सोने का दिखावा करने वालों को जगाना चाहते हैं...

किसके लिये आप कर रहे हैं ये सब. जिनके लिये कर रहे हैं उन्हें  कोई मतलब ही नहीं.
जनता के दिमाग में घुसा दिया गया है कि भ्रष्टाचार खत्म हो ही नहीं सकता.
बाबा की सम्पत्ति का ब्यौरा सब मांग रहे हैं, और उसमें भी छेद खोज रहे हैं लेकिन बाकी दागी-बागी किसी से आजतक पूछने की हिम्मत नहीं जुटा पाये कि भैया नेताजी, उद्योगपति जी और अफसर जी आपके पास कितना धन है, कहां कहां कितनी सम्पत्ति है.
बाबा ने ट्रस्टों के बारे में बता दिया वो तो चलो ठीक है लेकिन कम्पनियों के बारे में क्यों नहीं बताया.
किसी राजनीतिक दल का लेखा-जोखा लेने की हिम्मत आजतक नहीं हुई.
बाबा नींबू-पानी-शहद लेने पर तैयार हो गये हैं, इस पर बहुत बड़ी आपत्ति है. चैनल वाले कह रहे हैं कि ऐसा क्यों कर रहे हैं बाबा.
बाबा ने कानून तोड़ा, लेकिन सुनील कुमार की पिटाई करने वालों ने क्या कानून की प्रतिष्ठा में इजाफा किया.
जिस उम्र में युवा सुरा-सुन्दरी की कल्पना करने लगते हैं, उस उम्र में बाबा एक कपड़े को पहन योग सिखाना प्रारम्भ करते हैं. हमारे जैसे बड़बड़ाने वाले कितने लोगों में हिम्मत है ऐसा करने की.
बाबा ने पूरे देश में गांव गांव जाकर जागृति  फैलाने का कार्य किया, कितने लोगों ने ऐसा किया. कितने लोग घूमे हैं गांव-गांव.
बाबा ने क्यों पहन लिया महिलाओं का चोला. अपनी जान बिना मतलब में खतरे में डालना कोई बुद्धिमानी है. यदि पुलिस बाबा की सुरक्षा के लिये आई थी तो क्या सभी नेताओं की सुरक्षा इसी तरह से करती है पुलिस.
और फिर लाख कमियां हों बाबा के अन्दर, हो भी सकती हैं, आखिर रेमण्ड्स मैन होना तो लगभग नामुमकिन है, लेकिन उनके द्वारा उठाये जा रहे मुद्दे क्या कोई मायने नहीं रखते. अरे कानून बने तो सही, बाबा की भी जांच उसी स्कैनर से हो जाये.
हत्या-बलात्कार-डकैती-धोखाधड़ी के आरोपी संसद-विधानसभा में पहुंच कर माननीय हो जाते हैं और एक व्यक्ति जो व्यवस्था की कमी दिखा रहा है उस के लिये पहले ही अपराधी सिद्ध किया जा रहा है.
भ्रष्टाचार की लड़ाई आम आदमी को लड़ना चाहिये बाबा कौन होते हैं. फिर हमें नेताओं और कानूनों की भी जरूरत है क्या. सारी लड़ाई तो आम आदमी खुद ही लड़ सकता है और लड़ता चला भी आ रहा है और यह भी सम्भव है कि हजार-डेढ़ हजार साल में भारत के आम आदमी की यह सारी दिक्कतें दूर हो जायें.
बाबा को योग ही सिखाना चाहिये. वकील, डाक्टर, अध्यापक, व्यापारी फिर राजनीति में क्यों दाखिल हो जाते हैं उन्हें भी इस्तीफा देकर अपना धन्धा ही संभालना चाहिये.
बाबा ने लोगों से मांगकर धन कमाया उससे तमाम अन्य प्रोजेक्ट स्थापित किये, क्यों किये? उनका यह काम नहीं था, उनका काम था, उस धन से मठ बनाकर चुपचाप बैठ जाते और प्रवचन करते रहते. क्या फायदा सैकड़ों हजारों लोगों को रोजगार देने का, क्या लाभ तमाम गांवों में कार्य करने का.
योगी हैं फ्री में सिखायें, बहुत कमा चुके हैं. डाक्टर, अध्यापक, वकील, व्यापारी इन लोगों से भी अपील की जाये कि बहुत कमा लिया , फ्री में काम करें.

16 comments:

  1. फिलहाल तो मिस काल और एसएमएस से ही सब कुछ हो जाने वाला बताया जा रहा है.
    आदर्श या बेहतर स्थितियां के लिए कल्‍पना हो, विचार या प्रयास, स्‍वागतेय होना चाहिए.

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  2. सहमत हूँ आपसे......

    बाबा ने क्या कमाया और क्या प्रोजेक्ट स्थापित किये सबको पता हैं......... फिर भी उन्हीं से सवाल .... पर इस देश के नेताओं के पास कितना धन कितनी जायदादें हैं यह सवाल लोगो को पसंद नहीं आ रहे ......

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  3. एक नई दृष्टि विकसित हुई। अच्छा लगा।

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  4. सब बादशाह के गुलाम हैं।

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  5. बाबा रामदेव को नसीहत देने वालों में यही गड़बड़ है - वे नसीहत देने की पात्रता नहीं रखते या खो चुके हैं!

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  6. आप किसी भी अखबार को उठाकर देखिये, हर रोज भ्रष्टाचार के तमाम किस्से मिलेंगे. पुलिस की क्रूरता, रिपोर्ट दर्ज न करने, गलत ढंग से फंसाने के सैकड़ों मामले पढ़ने को मिलते हैं.
    अब किसी भी अधिकारी, नेता से बात करो तो सब सही बताता है, कहता है कि जांच के बाद कार्रवाई होगी.
    अरे जो सबको दिखता है वह इनको नहीं दिखता. या तो पूरा भारत के लोगों में झूठ बोलने की आदत या बीमारी फैलने लगी है या फिर आप सत्य को स्वीकार नहीं करते.
    अखबार में छ्पने वाली ऐसी सभी वारदातें/शिकायतें झूठी तो नहीं हो सकतीं.
    तो फिर ऐसे सिस्टम को क्या कहा जाये. बात करेंगे कि हम सबसे बढ़िया हैं. ये. वो.

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  7. पता नहीं लोग कब समझेंगे सरकार की कुटिल मानसिकता

    आभार

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  8. भाई बाबा की कमाई से किसी को क्या आपत्ती हो सकती है और भागने से भी शायद नही होना चाहिये पर अपने नेताओ से भरोसा खो चुका समाज आज आदर्श पुरूष की तलाश मे भटक रहा है उस पर ये की जो भी सामने आयेगा नेता और प्रेस उसकी खाल उतारने मे कोई कसर न छोड़ेगा ऐसे मे किसी सर्व मान्य व्यक्ती की खोज जारी है मेरे शब्दो मे कहूं तो वाटर प्रूफ़ की आपने मेरे लेखो पर जो टिप्पणिया की है उससे मुझे आपकी सोच का अंदाजा है और पीड़ा का भी आप सत्ता सुंदरी के प्रेम पत्र को फ़िर पढ़ें तो आपको ऐसे व्यक्ति का क्राईटेरिया और बाबा से अब तक हुई गलतियों का अंदाज मिल जायेगा वह पत्र मैने आंदोलन शुरू होने के पहले लिखा था

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  9. बाबा की कमाई से आपत्ती है

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  10. हमारे यहाँ एक कहावत है
    "आप काणी खसम को नाम धरना"

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  11. is mamle/mudde ko aacharya girijeshji ki vichar samichin lag rahe..........

    pranam.

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  12. पता नहीं लोग कब समझेंगे सरकार की कुटिल मानसिकता| धन्यवाद|

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  13. .

    बाबा जब तक योग द्वारा देश-विदेश में लोगों को स्वास्थ्य देते रहे , और अन्य बहुत से योगदान जिनसे देश का लाभ था , तो सरकार को कष्ट नहीं हुआ। सारा क्रेडिट (श्रेय) अपने खाते में ले लिया । लेकिन जब अपना सिंघासन डोलता हुआ लगा तो कायरों की तरह , सोयी हुयी निदोष जनता को मारा -पीटा।

    लोग 'intention' पहचानना भी नहीं जानते । बाबा भ्रष्टाचार और काला धन के मुद्दे पर लड़ रहे हैं। जो बाबा के खिलाफ हैं वे या तो स्वयं भ्रष्टाचारी है अथवा नितांत स्वार्थी हैं। बाबा रामदेव जो कर रहे हैं , वो एक संत ही कर सकता है। देशभक्ति का जज्बा भी ईश्वरीय कृपा से पैदा होता है। पूर्वाग्रहों से ग्रसित कुतर्कियों को बाबा की देशभक्ति और गरीबों के लिए स्वास्थ्य और उनकी खुशहाली का जज्बा इतनी आसानी से नहीं समझ आएगा।

    ये देश आजादी के ६५ साल बाद भी गुलाम है। गुलाम है बहुत से so called भारतीयों की भी मानसिकता । दो टुकड़ों में बंटा हुआ है ये देश । आधा राष्ट्र सबको जोड़ना चाहता है , जबकि दूसरा आधा हिस्सा उन्हें तोड़ देना चाहता है । वो नहीं चाहता की भारत देश का विकास हो और खुशहाली आये।

    समय आ गया है की हम ऐसे लोगों को चिन्हित करते चलें ।

    .

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  14. बाबा तो देश के डाक्टर है देश को जगाना चाहते है लेकिन ये तो भारत है जो जगता ही नहीं लेकिन थकना नहीं क्यों की मानवता यही से निकलती है.

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मैंने अपनी बात कह दी, आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है. अग्रिम धन्यवाद.