Wednesday, October 12, 2016

ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत का कोई विकल्प आया या नहीं??

ढाई वर्ष से अधिक दूर रहने के बाद ब्लॉग पर वापसी। कृपया यह बताएं कि ब्लॉगवाणी या चिट्ठाजगत जैसा कोई एग्रीगेटर आया या नहीं। इन दोनों एग्रीगेटर के चलते कई अच्छे ब्लॉग पढ़ने को मिलते थे जिनके बारे में पहले से कोई सूचना नहीं होती थी। मुझे नहीं पता कि इनका कोई विकल्प आया या नहीं। यदि आया हो कृपया अवश्य बताएं।
जय श्री राम। 

Saturday, March 29, 2014

धन्य धन्य भारत के लोग ...

भारत का एक हर्क्युलिस दुर्घटनाग्रस्त हो गया और भारत के ही कुछ लोगों ने इस जहाज में से अपने काम की चीजें निकालना प्रारम्भ कर दिया.  पुलिस वाले भी बेचारे क्या करते आखिर लोकतन्त्र में लोगों की इच्छा ही तो सर्वोपरि है. जस्टिस काटजू ने एक बार नब्बे प्रतिशत भारतीयों के लिये एक बात कह दी थी जो बहुत ही अखरी, लेकिन यह घटनायें क्या जस्टिस काटजू को सही सिद्ध नहीं करतीं.

ईश्वर अगर आज साक्षात इस जमीन पर अवतरित होते तो सम्भवत: इस प्रकार के कानूनों को रद्द करा देते जिन कानूनों के तहत साक्ष्य की आवश्यकता न हो.  ईशनिन्दा कानून के अन्तर्गत न तो साक्ष्यों की ही जरूरत होती है और न ही झूठा आरोप लगाने वालों को किसी प्रकार के भी दण्ड इत्यादि की कोई व्यवस्था है. पूरे विश्व को इस प्रकार के कानूनों पर एक बार पुनर्विचार करने की आवश्यकता है.

Saturday, March 22, 2014

मुर्गा और संविधान में प्रदत्त बन्धुत्व और गरिमा...

कल मेरे एक मित्र ने मुझसे संविधान की प्रस्तावना के बारे में पूछा था. उन्हें पूरी याद थी और मैं भूल चुका था. इसमें समाजवादी प्रभुत्व सम्पन्न, बन्धुत्व और गरिमा जैसे बड़े बड़े शब्द थे और आत्मार्पित करने जैसा गुरुतर दायित्व.
आज एक चौराहे पर दो लड़के मोटरसाइकिल से जा रहे थे, दीवान जी और सिपाही जी ने उन्हें रोक लिया. कागजातों में कोई कमी थी. जिस पर उस लड़के को यह मुर्गा बनने का लघुतम दन्ड देकर छोड़ दिया. दूर कई सज्जन(?) हंस रहे थे. बन्धुत्व और गरिमा संविधान की प्रस्तावना में शोभा बढा रहे थे.
शायद सब-इन्स्पेक्टर से नीचे का कोई पुलिस कर्मी कागजात चेक नहीं कर सकता लेकिन दीवान जी चेकिंग कर रहे थे . किस कानून के अन्तर्गत कागजातों में कमी होने पर मुर्गा बनाने का दन्ड आरोपित किया जा सकता है.
और यह सब वही पुलिस कर्मी होते हैं जिनके सामने धड़ल्ले से ओवर लोडिड आटो-बसें सड़कों को रौंदते हुये गुजरते रहते हैं.