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साथ चलते चलते अचानक दोराहे पर जब हमसफर की राह अलग हो जाये तो ? |
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शस्य श्यामला यही है-मेरी मां-हम सब की जीवनदायिनी -जिसकी गोद में खेलने का मन करता है. |
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पेड़-एक शोक गाथा-ये भी कभी ऐसे ही लहलहाते थे जैसे सड़क के किनारे खड़े समय के ये गवाह.. |
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पीली-पीली सरसों-दूर तक लहलहाती हुई-प्रकृति का यह चित्रकार कौन है! |
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सड़क किनारे लगा कोल्हू-गन्ने से रस और फिर रस से गुड़-गरमागरम गुड़ खाने का मन करने लगा और फिर क्या था. |
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देख तेरे कस्बे की हालत क्या हो गई इन्सान. |
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वेस्ट मैनेजमेन्ट हमारे गांवों से अच्छा कहीं नहीं होता. सारा कूड़ा-कचरा उपजाऊ कम्पोस्ट में बदल जाता है. |
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जिन्दगी की एक और शाम तमाम हुई. घर का चूल्हा जलाने के लिये लकड़ियां तो जुटानी ही हैं. |
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सड़क पर टैम्पो और टैम्पो पर टंके हुये इन्सान. |
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अनिर्वचनीय |
अब कई व्यवसायिक फोटोग्राफरों की छुट्टी होने वाली है।
ReplyDeleteआपका बड़प्पन है, पाण्डेय साहब.. यहां तो जो भी अच्छा लगता है, बटन दबा देते हैं. और करें भी क्या, आता भी उतना ही है...
ReplyDeleteदैनिक जीवन भी कितना सुंदर है ... बस हम शायद इस ओर ध्यान ही नहीं देते हैं
ReplyDeleteachchha laga sir ..!
ReplyDeleteचित्रमय प्रस्तुति बहुत बढ़िया रही!
ReplyDeleteकसबा कुछ देखा सा लग रहा है
ReplyDeleteधीरू जी-इस देश के सारे कस्बे लगभग एक ही गति को प्राप्त हो रहे हैं...
ReplyDeleteबहुत सुंदर लगीं प्रकृति की ये छटाएं...... कैप्शन भी सुंदर जोड़े हैं..... आखिरी और दूसरे नम्बर की फोटो और कैप्शन बहुत ही अच्छे लगे.....
ReplyDeleteबहुत ही सजीव चित्र...यादेँ सजीव हो उठी।
ReplyDelete.
ReplyDeleteआदरणीय [ भारतीय नागरिक] जी ,
कुछ समय से आपके ब्लॉग पर कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण कोई पोस्ट नहीं दिख रही । आज इस पर पोस्ट देखकर अच्छा लगा। प्रकृति के बहुत सुन्दर चित्र लगाए हैं आपने ।
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मेरी 'उस' पोस्ट पर आपका कमेन्ट मिला। आपने जो लिखा है , वो बिलकुल सही लगता है । आपने जिधर इशारा किया था। मुझे भी वही लग रहा है। जिन लोगों की शरारत है वो स्पष्ट हो गया है । मैंने उचित निर्णय लेते हुए उस पोस्ट को हटा दिया है।
आपने एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाई। शिवम् मिश्रा जी का भी कमेन्ट मिला था। आप दोनों ने एक ही बात लिखी थी।
आप दोनों को ह्रदय से आभार।
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bahut badhiyaa, Man ko kabhee yo bhee bahlaa lenaa chahiye !
ReplyDeleteइतनी सुन्दर तस्वीरें कहाँ से ढूँढ कर लाये। अलग तरह की सुन्दर पोस्ट के लिये बधाई।
ReplyDeleteवाह! गन्ने का रस और ताजा गुड़! आप ने तो स्वर्ग लूट लिया!
ReplyDelete... atisundar !!
ReplyDeleteजीवन के रसों को कैमरे में उतारा है ... सुंदर चित्र हैं ..
ReplyDeleteबहुत सुंदर लगीं ये छटाएं..
ReplyDeleteभारतीय नागरिक जी
ReplyDeleteखूबसूरती को बहुत सुन्दर कैद किया है
आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं
सुन्दर चित्रण
ReplyDeleteघर का चूल्हा जलाने के लिये लकड़ियां तो जुटानी ही हैं yahi sach hai !
ReplyDeleteखूबसूरती को बहुत सुन्दर कैद किया है
ReplyDeleteबढ़िया प्रस्तुति
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ReplyDeleteEMI in Hindi
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