Saturday, January 15, 2011

राह चलते कुछ चित्र

साथ चलते चलते अचानक दोराहे पर जब हमसफर की राह अलग हो जाये तो ?
शस्य श्यामला यही है-मेरी मां-हम सब की जीवनदायिनी -जिसकी गोद में खेलने का मन करता है.

पेड़-एक शोक गाथा-ये भी कभी ऐसे ही लहलहाते थे जैसे सड़क के किनारे खड़े समय के ये गवाह..

पीली-पीली सरसों-दूर तक लहलहाती हुई-प्रकृति का यह चित्रकार कौन है!


सड़क किनारे लगा कोल्हू-गन्ने से रस और फिर रस से गुड़-गरमागरम गुड़ खाने का मन करने लगा और फिर क्या था.
देख तेरे कस्बे की हालत क्या हो गई इन्सान.

वेस्ट मैनेजमेन्ट हमारे गांवों से अच्छा कहीं नहीं होता. सारा कूड़ा-कचरा उपजाऊ कम्पोस्ट में बदल जाता है.

जिन्दगी की एक और शाम तमाम हुई. घर का चूल्हा जलाने के लिये लकड़ियां तो जुटानी ही हैं.

सड़क पर टैम्पो और टैम्पो पर टंके हुये इन्सान.
अनिर्वचनीय

21 comments:

  1. अब कई व्यवसायिक फोटोग्राफरों की छुट्टी होने वाली है।

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  2. आपका बड़प्पन है, पाण्डेय साहब.. यहां तो जो भी अच्छा लगता है, बटन दबा देते हैं. और करें भी क्या, आता भी उतना ही है...

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  3. दैनिक जीवन भी कितना सुंदर है ... बस हम शायद इस ओर ध्यान ही नहीं देते हैं

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  4. चित्रमय प्रस्तुति बहुत बढ़िया रही!

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  5. कसबा कुछ देखा सा लग रहा है

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  6. धीरू जी-इस देश के सारे कस्बे लगभग एक ही गति को प्राप्त हो रहे हैं...

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  7. बहुत सुंदर लगीं प्रकृति की ये छटाएं...... कैप्शन भी सुंदर जोड़े हैं..... आखिरी और दूसरे नम्बर की फोटो और कैप्शन बहुत ही अच्छे लगे.....

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  8. बहुत ही सजीव चित्र...यादेँ सजीव हो उठी।

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  9. .

    आदरणीय [ भारतीय नागरिक] जी ,

    कुछ समय से आपके ब्लॉग पर कुछ तकनीकी गड़बड़ी के कारण कोई पोस्ट नहीं दिख रही । आज इस पर पोस्ट देखकर अच्छा लगा। प्रकृति के बहुत सुन्दर चित्र लगाए हैं आपने ।


    --------------

    मेरी 'उस' पोस्ट पर आपका कमेन्ट मिला। आपने जो लिखा है , वो बिलकुल सही लगता है । आपने जिधर इशारा किया था। मुझे भी वही लग रहा है। जिन लोगों की शरारत है वो स्पष्ट हो गया है । मैंने उचित निर्णय लेते हुए उस पोस्ट को हटा दिया है।

    आपने एक जिम्मेदार नागरिक की भूमिका निभाई। शिवम् मिश्रा जी का भी कमेन्ट मिला था। आप दोनों ने एक ही बात लिखी थी।

    आप दोनों को ह्रदय से आभार।

    .

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  10. इतनी सुन्दर तस्वीरें कहाँ से ढूँढ कर लाये। अलग तरह की सुन्दर पोस्ट के लिये बधाई।

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  11. वाह! गन्ने का रस और ताजा गुड़! आप ने तो स्वर्ग लूट लिया!

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  12. जीवन के रसों को कैमरे में उतारा है ... सुंदर चित्र हैं ..

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  13. बहुत सुंदर लगीं ये छटाएं..

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  14. भारतीय नागरिक जी
    खूबसूरती को बहुत सुन्दर कैद किया है
    आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

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  15. घर का चूल्हा जलाने के लिये लकड़ियां तो जुटानी ही हैं yahi sach hai !

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  16. खूबसूरती को बहुत सुन्दर कैद किया है
    बढ़िया प्रस्तुति

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मैंने अपनी बात कह दी, आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है. अग्रिम धन्यवाद.