Thursday, July 6, 2017

वाहनों में हेडलाईट हमेशा ऑन रहेंगी

सरकार के निर्णय के अनुसार सभी वाहनों में अब हेडलाईट हमेशा ही ऑन रहेंगी. इन वाहनों में हेडलाइट को ऑफ करने का स्विच हटा दिया गया है. सरकार ने ये निर्णय भारत में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं को लेकर किया है. लेकिन क्या हर समय जलती रहने वाली ये हेडलाइट सामने से आने वाले वाहन चालक की नजर पर विजिबिल्टी पर बुरा प्रभाव नहीं डालेंगी. नये वाहनों में आने वाली हेडलाइट दिन में भी चकाचौध रोशनी देती हैं जिससे कई बार मैंने खुद नजरों में एकाएक चौंध महसूस की है. ये व्यवस्था उन जगहों के लिए तो सही हो सकती है जहाँ लगातार कुहरा पड़ता हो, लेकिन हमारे जैसे भौगोलिक क्षेत्र के लिए ये व्यवस्था उचित नहीं लगती.

सड़क दुर्घटनाओं के तीन मुख्य कारण हैं, पहला नाकाबिल चालक दूसरा वाहनों की खस्ता हालत तीसरा ओवरलोडिंग. नाकाबिल लोगों को लाइसेंस मिल जाता है, व्यवस्था कैसे काम करती है, सबको पता है. वही व्यवस्था वाहनों को फिटनेस देती है और उसी व्यवस्था में ओवरलोडिंग होती है. हमारे पास एर्रिंग ड्राइवर्स पर त्वरित कार्रवाई का कोई तरीका नहीं, वाहनों की हालत की सही रिपोर्टिंग की कोई व्यवस्था नहीं और ओवरलोडिंग पर काबू पाने का कोई जरिया नहीं. और न ही सरकार इसे लेकर ज्यादा गंभीर नजर आती है.

इसलिये इस एक व्यवस्था से दुर्घटनाओं में कमी आएगी, एक सदेच्छा ही मानी जा सकती है. अच्छा ही लगेगा यदि यह व्यवस्था वाकई कामयाब होती है. 

Monday, July 3, 2017

ओवैसी का विवादित बयान, कहा संसद में बनते हैं मुस्लिम विरोधी कानून

इस खबर को पढ़ें और निहितार्थ को पहचाने. ये एक तरह से रिएक्शन मापने को टेस्ट है इस के जरिये सिर्फ यह देखा जा रहा है कि इस तरह के बयानों से किस समाज पर क्या प्रतिक्रिया होगी. इसके साथ ही भारतीय कानून कितने आगे तक जाकर कार्रवाई कर सकते हैं.  ये मात्र अपने आप को मुस्लिमों का हमदर्द दिखाने के लिए या केवल लोकप्रियता हासिल करने भर को नहीं है. जो व्यक्ति खुल्लमखुल्ला  कहे कि संसद और विधान सभाओं में मुस्लिमों के विरुद्ध क़ानून बनते हैं वह निश्चित ही बहुत चालाक व्यक्ति है. इसे केवल एक अनर्गल प्रलाप के रूप में लेना उचित नहीं होगा. भारतीय समाज को खुद तो आत्मावलोकन करना ही पड़ेगा, लेकिन उससे बढ़कर संविधान की जिम्मेदारी निर्वहन करने वाले लोगों को ऐसे प्रलाप करने वालों के विरुद्ध त्वरित और कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए. 

Saturday, July 1, 2017

पुस्तक, ब्लॉग, टीवी और फेसबुक

पुस्तकों में लोगों का रुझान लगभग समाप्त होता जा रहा है. पठन पाठन की स्थितियां भी आज से दस पंद्रह पूर्व जैसी थीं, वैसी नहीं रहीं. बच्चों पर उनके स्कूल बैग भारी पड़ गए. गृहिणियों को एक था कपूर के सीरियल और बाकी जो पुरुष थे उनको भी टीवी और इंटरनेट ले डूबा. वैसे ही जैसे सोशल मीडिया के प्रमुख सितारे फेसबुक और व्हाट्सएप्प ने ब्लॉग में सेंध मार दी और इन्हीं मैसेन्जर्स ने मोबाइल कम्पनियों की कॉल और एस एम एस जैसी सुविधाओं को किनारे लगा दिया.
तकनीकी अपग्रेडेशन तो होना ही है, इससे न तो बचा जा सकता है न ही बचा जाना चाहिए, लेकिन ऐसा भी न हो कि ये अपग्रेडेशन व्यक्ति पर भारी पड़ जाए. आने वाला समय कृत्रिम बुद्धिमत्ता का है. वैसे तो अभी भी यह काम में आ ही रही है. आप दो चार विज्ञापन देखिये, इंटरनेट आपको आपकी रूचि के अनुसार दस विज्ञापन प्रस्तुत कर देता है. आपके द्वारा मोबाईल या लैपटॉप पर ब्राउज किये गये पृष्ठों के आंकड़े एकत्र किये जाते हैं और तदनुसार ही आपकी रूचि के अनुरूप वेब पेज या विज्ञापन सामने आ जाते हैं.
बहरहाल, इन सब तकनीकी विशेषताओं के चलते व्यक्ति का जो समय पत्र पत्रिकाओं और कहानी कविताओं के पठन पाठन में लगता था, वह समय इन सभी अप्लिकेशन ने निगल लिया. इसका एक कारण यह भी रहा कि यह सुगम हैं. व्यक्ति यदि पढ़ नहीं भी सकता या चाहता तो सुन सकता है और देख सकता है. पढ़ने की ज़हमत कौन उठाये. इसलिए सुविधा और सुगमता ने प्रिंट मीडिया, अखबार को छोड़कर, दरकिनार कर दिया.
हिंदी ब्लॉग में कतिपय कारणों से ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत जैसे एग्रीगेटर का बंद होना भी एक बड़ा कारण रहा. खैर जब वरिष्ठों के आह्वान (और आवाहन दोनों में अंतर है, क्या है मुझे इस समय बड़ा भ्रम है, कृपया बताएं) पर जब आज हिंदी ब्लॉग में लेख छापे जा रहे हैं तो यह भी निवेदन है कि ये दोनों या इन जैसे ही कोई अन्य एग्रीगेटर सक्रिय हों, जिससे कि ब्लॉग पर ब्लॉगर भी सक्रिय हो सकें. 

Wednesday, October 12, 2016

ब्लॉगवाणी और चिट्ठाजगत का कोई विकल्प आया या नहीं??

ढाई वर्ष से अधिक दूर रहने के बाद ब्लॉग पर वापसी। कृपया यह बताएं कि ब्लॉगवाणी या चिट्ठाजगत जैसा कोई एग्रीगेटर आया या नहीं। इन दोनों एग्रीगेटर के चलते कई अच्छे ब्लॉग पढ़ने को मिलते थे जिनके बारे में पहले से कोई सूचना नहीं होती थी। मुझे नहीं पता कि इनका कोई विकल्प आया या नहीं। यदि आया हो कृपया अवश्य बताएं।
जय श्री राम।