हैदराबाद में फिर धमाके हो गये. फिर अब बयानबाजी का दौर शुरू हो जायेगा कि अपराधियों को बख्शा नहीं जायेगा. आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता. संवेदनायें प्रकट करने के लिये नेताजी टेलीविजन पर बयान पढ़ते हुये दिखाई देने लगेंगे. कड़े कदम उठाये जाने की बातें फिर दोहराई जायेंगी. मुआवजे की राशि की घोषणा, टेलीविजन पर बहस-मुबाहसा. अगर पिछले बम-विस्फोटों के समय के बयानों को देखा जाये तो फर्क सिर्फ समय, स्थान और बोलने वालों का तथा मरने वालों का होगा. यदि कार्यपालिका पूरी तत्परता के साथ काम करे तो मजाल है कि कोई बच कर निकल जाये. लेकिन ऐसा हो क्योंकर. जिम्मेदारी एक-दूसरे के ऊपर टालना सब को बखूबी आता है. हर कोई जानता है कि भारत में भ्रष्टाचार इस सब के मूल में है, लेकिन सब ठीकरा जनता के ऊपर फोड़ देते हैं, जनता ग्लानि से भर जाती है और अन्तत्वोगत्वा फिर से उसी जाल में फंस जाती है. तो फिर से चार दिन सोशल मीडिया पर भड़ास निकालिये और जब समय आये तो भ्रष्टाचार की नदी में डुबकी लगाईये और जब वोट देने जायें तो नाम के आगे-पीछे देखकर मोहर लगाईये. क्योंकि इन धमाकों में काम आता है सिर्फ आम आदमी, जिसकी वकत वोट देने के समय भर तक ही होती है.