पिछली पोस्ट में एक लिंक दिया हुआ था जिसमें वर्णित था कि हैदराबाद के एक मंदिर में घंटी-घण्टे बजाने पर रोक लगा दी गयी है. आज उसी वेब-एड्रेस पर अंकित है कि एक स्थानीय अखबार ने बताया कि वहाँ के डीसीपी ने यह कहा है कि वह फोटो पहले की है और वहाँ कोई रोक नहीं है. बहरहाल, हमारे यहाँ पुलिस की छवि ऐसी बन चुकी है कि उसकी कही हुई बातों पर विश्वास मुश्किल से ही होता है. पुलिस को ऐसे प्रयास करने चाहिये कि किसी भी दशा में ऐसे कार्य न हों जिससे किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न हो.
आज सुबह एक खबर पर नजर पड़ी जिसमें लिखा था कि सैयद अली शाह गिलानी कश्मीरी मिशनरियों के समर्थन में आगे आये. अंदर पढ़कर और आश्चर्य हुआ जहाँ यह ज्ञात हुआ कि कश्मीर की शरिया अदालत ने चार ईसाइयों को जम्मू-कश्मीर से हमेशा के लिए बाहर जाने का आदेश सुना दिया है. इन का गुनाह यह था कि इन्होंने कुछ मुस्लिमों को धर्म परिवर्तन कर ईसाई बना दिया था. कमाल है एक धर्म-निरपेक्ष देश में शरई अदालतें. इस पर सब चुप हैं.
कहीं डेरा से समर्थन माँगा जाता है तो कहीं बुखारी किसी दल को समर्थन देने का फतवा सा देते हुए नजर आते हैं. हर दल धर्मनिरपेक्ष है लेकिन नीतियाँ आदमी के लिए नहीं, उसकी जाति, उसके धर्म के हिसाब से बनने के वायदे किये जा रहें हैं. धन्य हैं देश के ये कर्णधार.